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AMT VS CVT VS DCT VS DSG VS TORQUE CONVERTOR IN HINDI

AMT VS CVT VS DCT VS DSG VS TORQUE CONVERTOR IN HINDI



नमस्कार दोस्तों आपने पहले AMT के बारे में जाना तो आपने पढ़ा कि एएमटी मैन्युअल गियर बॉक्स है ना कि ऑटोमेटिक।
तो आपने सोचा होगा कि असली ऑटोमेटिक क्या होता है? तो आज हम फेमस ऑटोमेटिक गियर बॉक्स के बारे में विस्तार से बात करेंगे जिनमें C.V.T. , D.C.T./ D.S.G.,  Torque convertor आदि शामिल है।
इसमें कोई ज्यादा टेक्निकल बात ना करके केवल टेक्नोलॉजी को अपनी मातृभाषा हिंदी में सरल शब्दों के साथ पहुंचाने का प्रयास है तो आप इसे उसी तरीके से लेंगे तो चलिए शुरू करते हैं:-
सबसे पहले हम सबसे पुरानी ऑटोमेटिक सिस्टम टॉर्क कनवर्टर यानी टीसी पर बात करेंगे।

1. टॉर्क कन्वर्टर:-

Torque converter कुछ पार्ट्स से मिलकर बना होता है, जिनमें एक छोटा और एक बड़ा फैन शामिल है। फैन में 24 से लेकर 40 ब्लेड लगे होते हैं जो इंजन से कनेक्ट होता है। दूसरा फेन पहले फेन से जुड़ा होता है और दोनों फेन के बीच ऑयल भरा जाता है। दोनों फेन को आपस में सील कर दिया जाता है।
इनमें से एक फैन इंजन की तरफ लगा होता है जो इंजन को घुमाता है दूसरा फैन इंजन के घूमने के कारण उसमें भरे ऑयल के प्रेशर के साथ घूमता है इसी वजह से टॉर्च कनवर्टर में गियर चेंज होते हैं तो ऑयल की वजह से झटके महसूस नहीं होते वह काफी स्मूद गियर बदलते हैं और ड्राइवर को पता नहीं चलता।

AMT VS CVT VS DCT VS DSG VS TORQUE CONVERTOR IN HINDI
torque-convertor-diagram


इसका नाम torque converter कैसे?
इसमें बड़े फैन और छोटे फैन के बीच कुछ पार्ट लगाया जाता है जो टॉर्क को कई गुना बढ़ा देता है इसलिए इसे टॉर्क कनवर्टर कहा जाता है।
टॉर्क कन्वर्टर वाले वाहन को आप धक्का देकर स्टार्ट नहीं कर सकते जब आपके वाहन की बैटरी डेड हो। यह एक माइनस पॉइंट है क्योंकि इसमें व्हील घूमने पर वापस इंजन को नहीं घुमा पाते हैं और इसका थोड़ा पावर लॉस भी होता है।

फायदे:-
-यह रियल ऑटोमेटिक होता है
-आपको झटके महसूस नहीं होते हैं।
-क्लच नहीं होता है
-यह सस्ता सिस्टम होता है।

भारत में  torque converter के साथ आने वाली गाड़ियां:-

भारत में आने वाली गाड़ियां जो इस सिस्टम के साथ आती है इनमें हुंडई i10, i20 शामिल है और अब इनमें C.V.T.आता है। इनके अलावा फोर्ड इकोस्पोर्ट, फोर्ड एंडेवर, मारुति की आटोमेटिक सियाज फॉर स्पीड, टाटा की हेक्सा आदि कई कारें भारत में torque converter  गियर बॉक्स के साथ उपलब्ध है।


2. C.V.T. :-

(continuous variable transmission)
कंटीन्यूअस वेरिएबल ट्रांसमिशन
CVT में कोई गियर वाला सिस्टम नहीं होता है इसको हम साइकिल के उदाहरण से समझ सकते हैं जैसे साइकिल में आगे की ओर टायर को घुमाने के लिए बड़ा चैन व्हील लगाया जाता है तथा वही पीछे के टायर में छोटा चैन व्हील भी लगाया जाता है यह दोनों चैन व्हील एक चैन के साथ जुड़े होते हैं। मतलब इन पर एक चैन लगी हुई होती है और पीछे वाला चैन व्हील आगे के चैन व्हील की तुलना में काफी छोटा होता है।
इनमें हम साइकिल को स्टैंड पर लगाकर देखते हैं कि आगे के चैन व्हील पर पेडल लगे होते हैं उसको एक चक्कर घूमाते हैं तो देखते हैं कि पीछे वाला छोटा चैन व्हील 4 -5 चक्र घूम जाता है।
CVT के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है इसमें चैन की जगह बेल्ट लगी होती है।वह बेल्ट छोटे और बड़े हिस्से पर जाती रहती है  स्पीड व टॉर्क बेल्ट के छोटे बड़े हिस्से पर ट्रैवल करने के कारण बदलते रहते हैं।
हमें हाई स्पीड पर अधिक टॉर्क की आवश्यकता नहीं होती है, जितना की गाड़ी को शुरुआत में पिकअप करने के समय होती है।
इसमें रबड़ की बेल्ट की जगह वर्तमान में छोटे-छोटे पार्ट्स से बनी स्टील की बड़ी बेल्ट का इस्तेमाल किया जाता है, जो तापमान से या समय के साथ बढ़ती नहीं है, खींचती नहीं है।
CVT  में शुरुआत में आरपीएम अधिक होते हैं स्पीड कम होती है तथा बाद में आरपीएम कम स्पीड अधिक हो जाती है।
यह गियर बॉक्स कम आरपीएम पर भी अधिक स्पीड प्रोवाइड करा देता है।
इसलिए यह अन्य गियर बॉक्स की तुलना में अधिक माइलेज दे पाता है। यह गियर बॉक्स मैनुअल कार के बराबर या उससे अधिक एवरेज निकाल देता है।
यह गियरबॉक्स काफी स्मूद है।
CVT में अभी और इंप्रूव किया जा सकता है परंतु अभी भी CVT काफी अच्छा ट्रांसमिशन है इसको हमें कंसीडर करना चाहिए।

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cvt-diagram


CVT गियर बॉक्स वाली गाड़ियां:-

भारत में सीवीटी गियर बॉक्स के साथ आने वाली गाड़ियों में होंडा सिटी, टोयोटा यारिस, मारुति सुजुकी बलेनो, होंडा जैज़, निसान माइक्रा, होंडा अमेज, डैटसन, हुंडई की i20 आदि शामिल है|


आपको जानकर आश्चर्य होगा कि टू व्हीलर में भी CVT  सिस्टम आता है। भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में जितने भी स्कूटर शामिल है, जैसे:- होंडा एक्टिवा, टीवीएस जूपिटर, सुजुकी बुर्गमैन, टीवीएस स्ट्रीक, हीरो ड्यूट आदि सभी स्कूटर्स में CVT मौजूद है और यह मैनुअल से काफी अच्छा काम करते हैं।


डी.सी.टी. या डी.एस.जी. :-(dual cluch transmission)

DCT और DSG दोनों एक ही हैं।
यह एक एडवांस गियर बॉक्स सिस्टम है जो अधिकतर अधिक स्पीड वाली कारों में इस्तेमाल किए जाते हैं, परंतु अब लगभग सामान्य कारो में भी मौजूद है। एक तरीके से देखें तो यह भी एक मैन्युअल ट्रांसमिशन ही है, क्योंकि इसमें भी क्लच लगे होते हैं जो दो होते हैं , साथ में गियर भी होते हैं जो फाइव स्पीड से लेकर टेन स्पीड तक मौजूद है कई कंपनियां तो यह गियर बॉक्स अलग नाम से तीन व चार क्लच के साथ भी बनाती है। जिसमें मर्सिडीज शामिल है।
परंतु इस गियर बॉक्स में क्लच मैनुअली ऑपरेट ना होकर ऑटोमेटिकली ऑपरेट होते हैं और यह क्लच काफी लंबे समय तक चलते हैं, क्योंकि यह जरूरत के हिसाब से ऑटोमेटिक वर्क करते रहते हैं।

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dct-transmission


प्रोसेस:-

जब हम किसी मैनुअल कार का गियर बदलते हैं तो पहले क्लच दबाते हैं, उसके बाद गियर बदलते हैं व फिर क्लच छोड़ते हैं यह सामान्य प्रक्रिया है। इस सारी प्रक्रिया में थोड़ा सा delay होता है या समय लगता है, चाहे वह कुछ सेकंड का ही क्यों ना हो।
डीसीटी या डी एस जी इस delay को कम करता है क्योंकि इसमें एक क्लच की जगह दो क्लच लगे होते हैं। शुरुआत में इसमें एक क्लच पहले गियर पर होता है और दूसरा क्लच दूसरे गियर पर होता है। जब गियर बदलना होता है तो पहले पहला क्लच काम करता है और गियर बदलने के बाद दूसरे क्लच के साथ काम करता है। और यह मैन्युअल गियर में लगने वाला टाइम बचा लेता है, जो गियर बदलने की समय लगता है।
जब आप सेकंड गियर से थर्ड गियर में जाते हैं या फाइव गियर से फोर्थ गियर में वापस आते हैं तो यही प्रोसेस वापस होता है दोनों क्लच एक साथ काम करते हैं। दोनों क्लच सभी गियर्स के साथ रहकर गियर चेंजिंग प्रोसेस को ईजी, स्मूद तथा फास्ट बना देते हैं।
इसमें एक क्लच 1, 3, 5, 7 इन गीयर्स को मैनेज करता है जबकि दूसरा क्लच 2,4,6,8 आदि गीयर्स को मैनेज करता है।
इसलिए इस गियर बॉक्स में एक गीयर से दूसरे गियर पर जाने में समय नहीं लगता है व लेग फील नहीं होता है।
लेंबोर्गिनी, फेरारी, फार्मूला रेसिंग कार्स आदि रेसिंग कार। लैंड रोवर, जगुआर, मर्सिडीज़, रोल्स रॉयल्स आदि लग्जरी कारों में यह DCT गियर बॉक्स लगा होता है यह कंप्यूटर से कंट्रोल होता है इसकी लाइफ काफी लंबी होती है।


अब हमारे दिमाग में प्रश्न आता है कि यह DCT इतना अच्छा गियर बॉक्स है तो कंपनियां सभी कारों के साथ इस ऑटोमेटिक गियर बॉक्स क्यों नहीं दे देती है?
क्योंकि यह टेक्नोलॉजी थोड़ी महंगी है और यह छोटी कारों में लगने वाले इंजन से भी ज्यादा महंगे गियर बॉक्स आ जाते है।
सस्ते DCT में थोड़ी प्रॉब्लम आ जाती है, इसलिए छोटी कारों में कंपनियां DCT देने से बचती है।
DCT अधिकतर बड़े इंजन वाली कारों के साथ ही दिया जाता है।

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dct-gear-lever


गुरूज्ञान:-

वर्तमान में भारत में ऑटोमेटिक कारों का मार्केट बढ़ा है, तो आप कभी भी कार लने जाए तो उसके ऑटोमैटिक वर्जन पर भी निगाह डालें तथा टेस्ट ड्राइव करके देखें आपको अच्छा लगेगा।
भारत में लगभग सभी ऑटोमेटिक गियर बॉक्स मौजूद है। ऑटोमेटिक गियर बॉक्स मैन्युअल के मुकाबले काफी अच्छा परफॉर्म करते हैं।
यह केवल हमें लगता है कि हम ही गाड़ी को अच्छी तरीके से चला सकते हैं मैन्युअल गियर चेंज करके, परंतु ऑटोमेटिक गियर बॉक्स भी काफी स्मार्ट होते हैं| जो यह सभी कार्य काफी कुशलता और तेज गति के साथ काफी कम समय में कर देते हैं। इस वजह से हमें एक ऑटोमेटिक कार कंसीडर करनी चाहिए जो एक अच्छे प्योर ऑटोमेटिक गियर बॉक्स के साथ मौजूद हो।


इस कंटेंट को यहां तक पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद और इसे आप अपने मित्रों व रिश्तेदारों के साथ शेयर करें जिससे वह भी इस जानकारी का लाभ ले सकें और भविष्य में आने वाली इन gearbox से संबंधित समस्याओं का समाधान अपनी मातृभाषा हिंदी में पा सके। अन्य प्रश्न हो तो कमेंट बॉक्स में रखे और साथ ही यह भी बताये की यह प्रयास कैसा रहा| 

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